What did P.M Modi say in his speech Today ??read carefully and enhance your knowledge.

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मेरे प्रिय 140 करोड़ परिवार जन दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और अब बहुत लोगों का अभिप्राय है कि जनसँख्या की दृस्टि से भी हम विश्व में नंबर 1 पर हैं। इतना बड़ा विशाल देश 140 करोड़ जनता मेरे भाई बहन मेरे परिवार जन आजादी का पर्व मना रहे हैं। में देश के कोटि कोटि जनों को , देश और दुनिया में भारत को प्यार करने वाले , भारत का सम्मान और गौरव करने वाले , कोटि कोटि जनों को आजादी के इस महान पर्व की अनेक अनेक शुभकामनाएं देता हूँ। मेरे प्यारे परिवार जान पूज्य बापू के नेतृत्व में असहयोग आंदोलन , सत्याग्रह के आंदोलन और भगत सिंह राजगुरु जैसे अनगिनत वीरों का बलिदान उस पीढ़ी में शायद ही कोई व्यक्ति होगा जिसने देश की आजादी में अपना योगदान न दिया हो में आज देश की आजादी के जंग में जिन जिन ने योगदान दिया है , बलिदान दिए हैं , तियाग दिया है और तपस्या की है उन सब को आदरपूर्वक नमन करता हूँ उनका नमन करता हूँ। आज 15 अगस्त महान क्रांतिकारी और अध्यात्म जीवन के रुचितुल्य प्रलयता श्री अरविंदो की 150वीं जयंती पूर्ण हो रही है। ये वर्ष स्वामी दयानन्द सरस्वती के 150वीं जयंती है , ये वर्ष रानी दुर्गावती के 500वीं जन्मसती का बहुत ही पवित्र अवसर है जो पूरा देश बड़े धूम धाम से मानाने वाला है। ये वर्ष मीरा बाई भक्ति युग की सीडमौड़, मीरा बाई की 525 वर्ष का भी ये पावन पर्व है।

मेरे प्यारे परिवार जन इस बार प्राकृतिक आपदा ने देश के अनेक हिस्सों में अकल्पनीय संकट पैदा किये। जिन परिवारों ने इस संकट में सहन किया है मैं उन सभी परिवार जनों के प्रति अपनी संवेदना प्रकट करता हूँ और राज्य – केंद्र सरकार मिल कर के उन सभी संकटों से मुक्त हो कर के फिर तेज गति से आगे बढ़ेंगे में ये विश्वास दिलाता हूँ। मेरे प्यारे परिवार जनों पिच्छले सप्ताह उत्तर-पूर्व में ख़ास तौर से मणिपुर और हिन्दुस्तान के भी कुछ भागों में हिंसा का जो दौर चला कई लोगों को अपना जीवन खोना पड़ा माँ बेटियों के सम्मान के साथ खेलवार हुआ लेकिन कुछ दिनों से लगातार शान्ति की ख़बरें आ रही है। देश मणिपुर के लोगों के साथ है , मणिपुर के लोगों ने पिछले कुछ दिनों से जो शांति बनाये राखी है उस शांति के पर्व को आगे बढ़ाएं और शान्ति से ही इस समाधान का रास्ता निकलेगा और राज्य और केंद्र सरकार मिल कर के उन समस्याओं के समाधान के लिए भरपूर प्रयास कर रही ह और करती रहेगी।

मेरे प्यारे परिवार जनों जब हम इतिहास के तरफ नजर करते हैं तो इतिहास में भी कुछ पल ऐसे आते हैं जो अमित छाप छोड़ कर जाते हैं और उसका प्रभाव सदियों तक रहता है और कभी कभी शुरुआत में वो बहुत छोटा लेकिन वो अनेक समस्याओं की जड़ बन जाती है। हमें याद है आज से 1000 या 1200 साल पहले इस देश पर आक्रमण हुआ। एक छोटे से राज्य के राजा का पराजय हुआ लेकिन तब पता तक नहीं था की एक घटना भारत को हजार साल की ग़ुलामी में फंसा देगी। और हम ग़ुलामी में जकरते गए जकरते गए जकरते गए जो आया लूटता गया जिसका मन चाहा हम पे आके सवार हो गया। कैसा विपरीत काल रहा होगा वो 1000 साल का। मेरे परिवार जनों घटना छोटी क्यों न हों लेकिन 1000 साल प्रभाव छोड़ के रही है। लेकिन में आज इस बात का जिक्र इसलिए करना चाहता हूँ कि भारत के वीरों ने इस कालखंड में कोई समय ऐसा नहीं था जब उनहोंने देश की आजादी के लिए बलिदान की परम्परा न बनायीं हो , माँ भारती बेरियों से मुक्त होने के लिए उठ खड़ी हुई थी जंज़ीरों को झगझोर रही थी और देश के नारी शक्ति , देश के युवा , देश के किसान , देश के गाँव के लोग , मजदूर , कोई हिन्दुस्तानी ऐसा नहीं था जो आजादी के सपने को लेके जीता नहीं था , आजादी को पाने के लिए माध मिटने के लिए तैयार होने वालों की एक बड़ी फ़ौज तैयार हो गयी थी। जनों में जवानी खपाने वाले अनेक महापुरुष ग़ुलामी के इन बेरियों को तोड़ने के लिए लगे हुए थे।

मेरे प्रिय परिवार जनों जान चेतना का वो व्यापक रूप , त्याग और तपस्या का वो व्यापक रूप जान जान के अंदर एक नए विश्वास दिलाने वाला पल आख़िरकार 1947 में देश आजाद हुआ। 1000 साल के ग़ुलामी में संजोये हुए सपने देश वासी पुरे करते हुए देखे। साथियो, मैं 1000 साल की बात इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि मैं देख रहा हूँ फिर एक बार देश के सामने मौका आया है इस ऐसे काल खंड में जी रहे हैं और ये हमारा स्वभाग्य है कि भारत के अमृत काल में , ये अमृत कल का पहला वर्ष है। या तो हम जवानी में जी रहे हैं या हम माँ भर्ती के गोद में जन्म ले चुके हैं और इस कालखंड में जो हम करेंगे और जो कदम उठाएंगे , जितना त्याग करेंगे तपस्या करेंगे , सर्वदिन हिताएं और सर्वदिन सुखाए , एक के बाद एक फैंसले लेंगे; आने वाले 1000 साल का देश का स्वर्णिम इतिहास उससे अंकुरित होने वाला है। इस कालखंड में होने घटनाएं आगामी 1000 साल के लिए इसका प्रभाव पैदा करने वाली है। ग़ुलामी के मानसिकता से बहार निकला हुआ देश पंच प्रनन को समर्पित होक एक नए आत्म विश्वास के साथ आज आगे बढ़ रहा है। नए संकल्पों को सिद्ध करने के लिए वो जी जान से जुड़ रहा है। मेरी भारत माता जो कभी ऊर्जा का समर्ध था लेकिन राख के ढेड़ में दबी पड़ी थी वो भारत माँ 140 करोड़ देशवासियों के पुरसार थे उनकी चेतना से फिर से एक बार जागृत हो चुकी है। माँ भारती जागृत हो चुकी है।मेरे प्रिय 140 करोड़ परिवार जन दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और अब बहुत लोगों का अभिप्राय है कि जनसँख्या की दृस्टि से भी हम विश्व में नंबर 1 पर हैं। इतना बड़ा विशाल देश 140 करोड़ जनता मेरे भाई बहन मेरे परिवार जन आजादी का पर्व मना रहे हैं। में देश के कोटि कोटि जनों को , देश और दुनिया में भारत को प्यार करने वाले , भारत का सम्मान और गौरव करने वाले , कोटि कोटि जनों को आजादी के इस महान पर्व की अनेक अनेक शुभकामनाएं देता हूँ। मेरे प्यारे परिवार जान पूज्य बापू के नेतृत्व में असहयोग आंदोलन , सत्याग्रह के आंदोलन और भगत सिंह राजगुरु जैसे अनगिनत वीरों का बलिदान उस पीढ़ी में शायद ही कोई व्यक्ति होगा जिसने देश की आजादी में अपना योगदान न दिया हो में आज देश की आजादी के जंग में जिन जिन ने योगदान दिया है , बलिदान दिए हैं , तियाग दिया है और तपस्या की है उन सब को आदरपूर्वक नमन करता हूँ उनका नमन करता हूँ। आज 15 अगस्त महान क्रांतिकारी और अध्यात्म जीवन के रुचितुल्य प्रलयता श्री अरविंदो की 150वीं जयंती पूर्ण हो रही है। ये वर्ष स्वामी दयानन्द सरस्वती के 150वीं जयंती है , ये वर्ष रानी दुर्गावती के 500वीं जन्मसती का बहुत ही पवित्र अवसर है जो पूरा देश बड़े धूम धाम से मानाने वाला है। ये वर्ष मीरा बाई भक्ति युग की सीडमौड़, मीरा बाई की 525 वर्ष का भी ये पावन पर्व है।

मेरे प्यारे परिवार जन इस बार प्राकृतिक आपदा ने देश के अनेक हिस्सों में अकल्पनीय संकट पैदा किये। जिन परिवारों ने इस संकट में सहन किया है मैं उन सभी परिवार जनों के प्रति अपनी संवेदना प्रकट करता हूँ और राज्य – केंद्र सरकार मिल कर के उन सभी संकटों से मुक्त हो कर के फिर तेज गति से आगे बढ़ेंगे में ये विश्वास दिलाता हूँ। मेरे प्यारे परिवार जनों पिच्छले सप्ताह उत्तर-पूर्व में ख़ास तौर से मणिपुर और हिन्दुस्तान के भी कुछ भागों में हिंसा का जो दौर चला कई लोगों को अपना जीवन खोना पड़ा माँ बेटियों के सम्मान के साथ खेलवार हुआ लेकिन कुछ दिनों से लगातार शान्ति की ख़बरें आ रही है। देश मणिपुर के लोगों के साथ है , मणिपुर के लोगों ने पिछले कुछ दिनों से जो शांति बनाये राखी है उस शांति के पर्व को आगे बढ़ाएं और शान्ति से ही इस समाधान का रास्ता निकलेगा और राज्य और केंद्र सरकार मिल कर के उन समस्याओं के समाधान के लिए भरपूर प्रयास कर रही ह और करती रहेगी।

मेरे प्यारे परिवार जनों जब हम इतिहास के तरफ नजर करते हैं तो इतिहास में भी कुछ पल ऐसे आते हैं जो अमित छाप छोड़ कर जाते हैं और उसका प्रभाव सदियों तक रहता है और कभी कभी शुरुआत में वो बहुत छोटा लेकिन वो अनेक समस्याओं की जड़ बन जाती है। हमें याद है आज से 1000 या 1200 साल पहले इस देश पर आक्रमण हुआ। एक छोटे से राज्य के राजा का पराजय हुआ लेकिन तब पता तक नहीं था की एक घटना भारत को हजार साल की ग़ुलामी में फंसा देगी। और हम ग़ुलामी में जकरते गए जकरते गए जकरते गए जो आया लूटता गया जिसका मन चाहा हम पे आके सवार हो गया। कैसा विपरीत काल रहा होगा वो 1000 साल का। मेरे परिवार जनों घटना छोटी क्यों न हों लेकिन 1000 साल प्रभाव छोड़ के रही है। लेकिन में आज इस बात का जिक्र इसलिए करना चाहता हूँ कि भारत के वीरों ने इस कालखंड में कोई समय ऐसा नहीं था जब उनहोंने देश की आजादी के लिए बलिदान की परम्परा न बनायीं हो , माँ भारती बेरियों से मुक्त होने के लिए उठ खड़ी हुई थी जंज़ीरों को झगझोर रही थी और देश के नारी शक्ति , देश के युवा , देश के किसान , देश के गाँव के लोग , मजदूर , कोई हिन्दुस्तानी ऐसा नहीं था जो आजादी के सपने को लेके जीता नहीं था , आजादी को पाने के लिए माध मिटने के लिए तैयार होने वालों की एक बड़ी फ़ौज तैयार हो गयी थी। जनों में जवानी खपाने वाले अनेक महापुरुष ग़ुलामी के इन बेरियों को तोड़ने के लिए लगे हुए थे।

मेरे प्रिय परिवार जनों जान चेतना का वो व्यापक रूप , त्याग और तपस्या का वो व्यापक रूप जान जान के अंदर एक नए विश्वास दिलाने वाला पल आख़िरकार 1947 में देश आजाद हुआ। 1000 साल के ग़ुलामी में संजोये हुए सपने देश वासी पुरे करते हुए देखे। साथियो, मैं 1000 साल की बात इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि मैं देख रहा हूँ फिर एक बार देश के सामने मौका आया है इस ऐसे काल खंड में जी रहे हैं और ये हमारा स्वभाग्य है कि भारत के अमृत काल में , ये अमृत कल का पहला वर्ष है। या तो हम जवानी में जी रहे हैं या हम माँ भर्ती के गोद में जन्म ले चुके हैं और इस कालखंड में जो हम करेंगे और जो कदम उठाएंगे , जितना त्याग करेंगे तपस्या करेंगे , सर्वदिन हिताएं और सर्वदिन सुखाए , एक के बाद एक फैंसले लेंगे; आने वाले 1000 साल का देश का स्वर्णिम इतिहास उससे अंकुरित होने वाला है। इस कालखंड में होने घटनाएं आगामी 1000 साल के लिए इसका प्रभाव पैदा करने वाली है। ग़ुलामी के मानसिकता से बहार निकला हुआ देश पंच प्रनन को समर्पित होक एक नए आत्म विश्वास के साथ आज आगे बढ़ रहा है। नए संकल्पों को सिद्ध करने के लिए वो जी जान से जुड़ रहा है। मेरी भारत माता जो कभी ऊर्जा का समर्ध था लेकिन राख के ढेड़ में दबी पड़ी थी वो भारत माँ 140 करोड़ देशवासियों के पुरसार थे उनकी चेतना से फिर से एक बार जागृत हो चुकी है। माँ भारती जागृत हो चुकी है।


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